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Muharram ul Haram 2021 | Is Muharram a happy festival? | What does Muharram mean? | मुहर्रमुल हराम 2021 | मुहर्रम का क्या मतलब है ?

Muharram ul Haram 2021 | Is Muharram a happy festival? | What does Muharram mean? | मुहर्रमुल हराम  2021 | मुहर्रम का क्या मतलब है ?

Tuesday, May 11, 2021



*फिलिस्तीन क्यों ???*

 जवाब आफाक रज़वी की कलम से...

अक्सर आये दिन हमारे मुआशरे में कुछ हज़रात का ये ऐतराज़ होता है कि हमारे इर्द गिर्द सैकड़ो मसाइल है, हिन्द में मुसलमानों पर तशद्दुद आये दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन हम फिलिस्तीन के मुताल्लिक इतने संजीदा क्यों हो जाते है कि अपने ऊपर हो रहे ज़ुल्म को छोड़ फिलिस्तीनियो का सोचते है।
इसकी वजूहात ये है

हज़रत उमामाह अल-बहीली رضي الله عنه से रिवायत है कि
_हुज़ूर नबी करीम ﷺ, ने इरशाद फरमाया, "मेरी उम्मत का एक गिरोह हक पर रहेगा, वोे अपने दुश्मन पर फतेह हासिल करंगे और जो लोग उनसे मुत्ताफिक न होंगे, वो उनको नुकसान न पहुँचा पाएंगे, जब तक अल्लाह न चाहेगा"।_
_सहाबा ने अर्ज़ किया : " या रसूलल्लाह ये लोग कहाँ हैं"?_
_हुज़ूर ﷺ ने फरमाया, “अल-कुद्स (यरूशलेम) में और इसके आसपास।_
📚 [अहमद]

साबित हुआ कि फिलिस्तीनियो की फ़ज़ीलत में खुद नबी ए रहमत ﷺ ने इरशाद फरमा रहे है, लेहाज़ा इनकी हिमायत करना, इनके लिए आवाज़ उठाना नसीब की बात है।
दूसरा पहलु : 
फिलिस्तीन में मौजूद मस्जिद अल-अक्सा मुसलमानो का किबलए अव्वल है ये मस्जिद अल हराम और मस्जिदे नबवी के बाद तीसरी सबसे मुकद्दस मस्जिद है और इसी मस्जिद में अल्लाह के आखरी नबी ﷺ ने तमाम नबियो की नमाज़ में इमामत फरमाई थी, और आप इसी जगह से मेराज की लिए तशरीफ़ ले गए थे।
साथ ही अल क़ुद्स यानी जेरुसलेम शहर,  मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा के बाद तीसरा सबसे मुक़द्दस शहर है।
इसके अलावा फिलिस्तीन अम्बिया की सरजमीं है, दुनिया में ज़्यादातर अम्बिया इसी सरज़मीं पर तशरीफ़ लाये, और आज इसी फिलिस्तीन की मुक़द्दस सरज़मीं पर कईं अम्बिया आराम फरमा रहे है।
इसलिए इस सरज़मी की ज़िम्मेदारी सिर्फ यहाँ के फिलिस्तीनियो की नही बल्कि दुनिया के तमाम 150 करोड़ मुसलमानों की हैं
मस्जिदे अक्सा सबसे पहले हज़रत उमर رضي الله عنه‎ के दौरे खिलाफत में फतेह हुई।
जो तमाम उम्मत के पास हज़रत उमर رضي الله عنه‎ की अमानत है जिसे संभाले रखना हमारा फ़र्ज़ है। इसके बाद दूसरी बार हज़रत सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी ने सलिबियों से इसे फतेह किया था, हालांकि सुल्तान इराक मे पैदा हुए दमिश्क (सीरिया) में रहे और मिस्र के गवर्नर बना के भेजे गए। अब सोचिये अगर सुल्तान भी अपनी सरज़मीन और अपने अतराफी लोगो का ही सोचते तो क्या क़ुद्स (जेरूसलम) फतेह कर पाते ?? हरगिज़ नही।
लेहाज़ा ये हम सब की ज़िम्मेदारी है कि क़ुद्स और इसके साथ तमाम फिलिस्तनी भाइयो का खैर ख्वा बने। क्योंकि यही वो फिकिस्तीनी हैं जो दुनिया के तमाम 150 करोड़ मुसलमानो की ज़िम्मेदारी अकेले निभा रहे है, ये मस्जिद अल अक़्सा की हिफाज़त की ज़िम्मेदारी है। जब वो लोग आपकी ज़िम्मेदारी भी खुद अकेले निभा रहे है तो आपका भी फ़र्ज़ बनता है कि आप उनका बढ़ चढ़ के साथ दे चाहे वो किसी भी शक्ल में हो।

याद रखिये वो दिन दूर नही जब यहूदी मस्जिद अल अक़्सा को शहीद कर देंगे तो इसका सवाल बरोज़े महशर हम सब से होगा।

अल्लाह रब्बुल हिज़्ज़त फिलिस्तीन और फिलिस्तीनियो की हिफाज़त फरमाए और हम सबको इनका खैर ख्वा बनाये और उन पर होने वाले ज़ुल्म के खिलाफ हमे आवाज़ उठाने की तौफीक अता फरमाए।

آميــــــــــــــــــــن بجاه شفیع المذنبین ﷺ

_✍🏼– आफाक अहमद रज़वी क़ादरी_

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