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Saturday, November 7, 2020

क्या होगा अगर  अमेरिका प्रेसिडेंट इलेक्शन 2020 जेओ बाइडन  जीत गया ? || US Presidential Election 2020


क्या होगा अगर  अमेरिका प्रेसिडेंट इलेक्शन 2020 जेओ बाइडन  जीत गया ? || US Presidential Election 2020

नाज़रीन कराम

आज कल दुनिया भर में ख़ुशी के माहौल चल रहें हैं। और आप सभी जानते हैं क्यों ? जी हाँ वजह है अमेरिका के इलेक्शन में जेओ बाइडन के जीतने के आसार।मानो ये इलेक्शन अपने ही वतन में होरहे हैं और अपना कैंडिडेट जीत रहा है। सिवाए सऊदी अरब के सारी दुनिया एक तरह से खुश ही नज़र आरही है।


चलो मान भी लेते हैं की अमेरिका के इलेक्शन में जेओ बाइडन जीत जाता है तो क्या सहुनि रियासतें दब जाएगी ? या हमारे लिए या सारी दुनिया के लिए अमेरिका की पॉलिटिक्स बदलेगी?


तो नाज़रीन आजके हमारे पोस्ट  का मौज़ू सूखन ये टॉपिक है की क्या होगा अगर  अमेरिका प्रेसिडेंट इलेक्शन  2020 जेओ बाइडन  जीत गया ? तो पोस्ट  को आखिर तक ज़रूर देखें। पसंद आने की सूरत में दोस्त अहबाब को भी शेयर करें। और अगर आप हमारे वेबसाइट पर नए हो तो वेबसाइट को सब्सक्राइब ज़रूर करलें और साथ ही लगा बेल का आइकॉन भी ऑल के साथ ज़रूर प्रेस करदें ताकि हमारे नई पोस्ट  की नोटिफिकेशन्स आपको बार वक़्त मिलते रहें।


तो चलिए नाज़रीन बिना वक़्त जाया किये अपना पोस्ट  शुरू करतें हैं।  मैं मोहम्मद हुसैन खान एक बार फिर आपका खैर मक़दम करता हूँ अपने इस वेबसाइट इस्लामिक वंडर्स में


इस्लामिक वंडर्स के नाज़रीन

अमेरिका में इलेक्शन क्या शुरू हुआ सारी दुनिया में हल चल सी मच चुकी हैं। इलेक्शन अमेरिका में है और कश मकश सारी दुनिया में, और दुनिया भर के एग्जिट पोल अपने रुझान देने लग गए।


जहाँ एक तरफ पाकिस्तान खुश दिखाई दे रहा है। वही इंडिया में 50/50 का माहौल है कुछ लोग जो ट्रम्प को एक खास वजह से पसंद करतें है वो काफी दुःख में है मानो कोई ICU में आखरी साँसे लेने लगा हो। और दूसरी तरफ वो लोग जो ट्रम्प को पसंद नहीं करते ,मानो उनके यहाँ बरसो बाद कोई औलाद पैदा होरही हो। ऐसे ख़ुशी और गम के माहौल हमारे यहाँ चल रहे हैं।

क्या होगा अगर  अमेरिका प्रेसिडेंट इलेक्शन 2020 जेओ बाइडन  जीत गया ? || US Presidential Election 2020


अगर मिडिल ईस्ट की बात करें तो टर्की खुश, फ्रांस में दुःख , अज़बइजान खुश आर्मेनिया में दुःख, रूस खुश तो इजराइल में दुःख , और सऊदी अरब में तो खासा ही दुःख नज़र आरहा है। ऐसे ही हर वो मुल्क जो ट्रम्प और उसकी पॉलिटिक्स को पसंद करता हो वो दुखी है और हर वो मुल्क जो अमेरिका से परेशां था वो खुश है।


मगर जो बात मैं समझना चाहता हूँ? वह ये है की क्या इस से यानि ट्रम्प के हारने और बाइडन के जीतने से कोई फरक पड़ेगा?

और जो मैं समझ रहा हूँ


आपने एक कहावत सुनी होगी। नयी बोतल में पुरानी शराब पर यहाँ माजरा ज़रा अलग दिखाई देरहा है , पुरानी बोतल में नयी शराब।

जी हाँ नाज़रीन एक और कहावत जो याद आरही है की हाथी के दांत दिखने के और खाने के और

 

दोस्तों क्या आपको नहीं लगता की आजके दौर में जहाँ जीतना और हारना वोट नहीं बल्कि मशीन तय करती हो वहां हार जीत बड़े शो ऑफ के साथ हो रहा है मानो इनसे बड़े सच्चे दुनिया में कोई नहीं। और ये बात मैं हवा में नहीं कहे रहा हूँ कोण कैसे जीत ता है ये तो आप सभी अच्छी तरह जानते हो और इसके पहले कई ऐसे केसेस भी देख चुके हो।


इस्लामिक वंडर्स के नाज़रीन मेरी जो बात करने की वजह है वो साफ़ है की क्या इसका असर दुनिया पे पड़ेगा ? और अगर पड़ेगा तो वो कैसा होगा। आपको शायद याद होगा की मैंने एक पोस्ट  पोस्ट की थी (आफ्टर 2023) अगर आपने वो नहीं देखि तो ज़रूर देख लें। इस से आपको सूरत हाल का जायज़ा हो जायेगा।


और वो ये की अभी जो पॉलिटिक्स दुनिया में चल रही थी वो एक मज़हब को लेकर हो रही थी यानि सीधा कहें तो इस्लाम के मुखालिफ।


और अब वक़्त बहोत तेज़ी से बदल रहा है। मुस्लिम मुमालिक इस बात से आगाह हो चुके है की उन्हें टारगेट किया जा रहा है। और वो अपने डिफेन्स के इंतेज़ाम में जुट भी चुके हैं। जो की आपको हालिया दिनों में देखने को मिल गया। लेहाज़ा बातिल क़ूवतों को भी ये अहसास हो गया है की अब तरीके में बदलाव का वक़्त है।


और हम अपने पुराने तरीके से उरूज नहीं पा सकेंगे या इसमें बहोत ज़्यादा वक़्त लगेगा। तो अब हमे अपनी कार करदगी में बदलाव करने पड़ेंगे। अब हम दुश्मन बांके नहीं दोस्त बन के अपने मक़सद को पाय तकमील तक पहुंचाएंगे। जिसे हम अपनी ज़बान में कहे तो घुसना तो है पर दुश्मन बन के नहीं अब दोस्त बन के।


दोस्तों जो शतरंज खेलते हों। उन्हें इशारा समझ आरहा होगा की जिस मोहरे से तकलीफ होती है उसे हटा दिया जाता है और क्यूंकि सामने वाला खिलाडी भी उस से होशियार हो चूका होता है इसलिए नयी चालों की शुरुवात करनी पढ़ती है।


दोस्तों पोस्ट  बनाने का मक़सद शायद आपको समझ आगया हो की अब हमे और भी ज़्यादा मोहतात होने की ज़रूरत है अब खेल भी बदलेंगे और खिलाडी भी और ज़ाहिर से बात है जब खेल और खिलाडी दोनों बदल जाये तो तरीका भी खुद बा खुद ही बदल जाता है।


हमे सिर्फ अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकडे रखना ह। बाकी काम उसका जिसके क़ब्ज़े में हम सब की जान है। और एक बात, ये जो भी आज कल दुनिया में हो रहा है सब बिता वर्ज़न है मतलब की सिर्फ टेस्टिंग है। अभी तो लाइव या जारी होना बाकी है।


इस बारे में आपके क्या ख्याल है हमे कमेंट करके ज़रूर बातें और पोस्ट  के बारे में भी अपने तासुरात  से ज़रूर नवाज़ें


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