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Monday, September 21, 2020


मुसलमानों  के उरूज का वक़्त करीब है | मुसलमानों  के दौर का आगाज | Beginning of Muslim era | Islamic Wonders

بِسۡمِ اللّٰہِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِیۡمِ

मुसलमानों  के उरूज का वक़्त करीब है | मुसलमानों  के दौर का आगाज | Beginning of Muslim era | Islamic Wonders

अस्सलाम अलैकुम दोस्तों

ना घबराव मुसलमानों अभी ईमान बाकी है
अभी इसलाम जिंदा है अभी कुरान बाकी है


जी हाँ नाज़रीन आज इस दौर में मुसलमान होना बहोत बड़ी तकलीफ का बाइस नज़र आता है। और उस से भी ज्यादा तो ईमान पर रहना मुश्किल हो गया है।

 

हर तरफ मुसलमान को शक की निगाह से देखा जाता है। हर कोई हम से दूर रहना चाहता हैं। जिस की असल वजह तो हम सब भलीभांति जानते हैं।  तो आज मैं उस पर बिलकुल बात नहीं करूंगा बल्कि इसके उलट, यानी ये सब कब खत्म होगा आज इस टाॅपिक पर डिसकस करेंगे। 


दोस्तों ये सब हालातों से दो चार होकर मुसलमान बिलकुल मायूस होगए हैं।


खवातीन हज़रात ये बात ज़हन नशीन कर लें कि मायूसी बरबादी की वो तेज़ रफ़्तार ट्रेन है जो अपने सवार को बड़ी  जल्दी ज़मीन के नीचे पहोंचा देतीं हैं। या उसे गुलामी की जंजीरों में कैद कर देतीं हैं।


और जब हमारा ईमान है कि अल्लाह सब कुछ कर सकता है तो फिर डर किस बात का? और उस पर सोने पे सुहागा हमारे सरकार मुहम्मद मुस्तफा स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का इरशाद की एक दिन सारे रुए ज़मीन पर मेरी उम्मत की हुक्मरानी होगी। बस अब हम क्यों ना उम्मीद हो?

 

चलो आज आप को एक तसल्ली बख़्श हदीस सुनाते हैं जिसे सुन कर इंशा अल्लाह आपका दिल जरूर सुकून पाएगा।

मुझे सिर्फ मिश्कात शरीफ की हदीस मिली है,  हालाँकि इस हदीस को अभी मैं तलाश कर रहा हूँ  जैसे ही दूसरी हदीसें मिल जाएगी इंशा अल्लाह जल्द ही ढून्ढ कर हवाला पेश करूँगा। 

بِسۡمِ اللّٰہِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِیۡمِ

عَن النُّعْمَان بن بشير عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «تَكُونُ النُّبُوَّةُ فِيكُمْ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ تَكُونَ ثُمَّ يَرْفَعُهَا اللَّهُ تَعَالَى ثُمَّ تَكُونُ خِلَافَةً عَلَى مِنْهَاجِ النُّبُوَّةِ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ تَكُونَ ثُمَّ يَرْفَعُهَا اللَّهُ تَعَالَى ثُمَّ تَكُونُ مُلْكًا عَاضًّا فَتَكُونُ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ تَكُونَ ثُمَّ يَرْفَعُهَا اللَّهُ تَعَالَى ثُمَّ تَكُونُ مُلْكًا جَبْرِيَّةً فَيَكُونُ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَكُونَ  ثُمَّ يَرْفَعُهَا اللَّهُ تَعَالَى ثُمَّ تَكُونُ خِلَافَةً عَلَى مِنْهَاجِ نُبُوَّةٍ» ثُمَّ سَكَتَ قَالَ حَبِيبٌ: فَلَمَّا قَامَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ كَتَبْتُ إِلَيْهِ بِهَذَا الْحَدِيثِ أُذَكِّرُهُ إِيَّاهُ وَقُلْتُ: أَرْجُو أَنْ تَكُونَ أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ بَعْدَ الْمُلْكِ الْعَاضِّ وَالْجَبْرِيَّةِ فَسُرَّ بِهِ وَأَعْجَبَهُ يَعْنِي عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ. رَوَاهُ أَحْمد وَالْبَيْهَقِيّ فِي «دَلَائِل النُّبُوَّة»

حضرت نعمان بن بشیر ، حذیفہ   ؓ  سے روایت کرتے ہیں ، انہوں نے کہا ، رسول اللہ صلی ‌اللہ ‌علیہ ‌وآلہ ‌وسلم نے فرمایا :’’ جب تک اللہ چاہے گا تم میں نبوت (کے اثرات) باقی رکھے گا ، پھر اللہ تعالیٰ اسے اٹھا لے گا ، پھر جب تک اللہ چاہے گا ، خلافت نبوت کے انداز پر ہو گی ، پھر اللہ تعالیٰ اسے بھی اٹھا لے گا ، پھر جس قدر اللہ چاہے گا کاٹنے والے بادشاہ ہوں گے پھر اللہ تعالیٰ اسے بھی اٹھا لے گا ، پھر جبریہ بادشاہت ہو گی اور یہ بھی جب تک اللہ چاہے گا رہے گی ، پھر اللہ تعالیٰ اسے بھی اٹھا لے گا ، پھر خلافت نبوت کی طرز پر ہو گی ۔‘‘ پھر آپ صلی ‌اللہ ‌علیہ ‌وآلہ ‌وسلم خاموش ہو گئے ۔ حبیب بیان کرتے ہیں ، جب عمر بن عبد العزیز ؒ نے خلافت سنبھالی تو میں نے ان کی یاد دہانی کے لیے انہیں یہ حدیث لکھی ، اور کہا : میں امید کرتا ہوں کہ ظالم بادشاہ اور جبریہ بادشاہت کے بعد آپ امیر المومنین ہیں ۔ وہ اس سے خوش ہوئے اور انہیں اچھا لگا ۔ ، رواہ احمد و البیھقی فی دلائل النبوۃ ۔

Mishkat ul Masabeeh#5378

Status: صحیح

मुसलमानों  के उरूज का वक़्त करीब है | मुसलमानों  के दौर का आगाज | Beginning of Muslim era | Islamic Wonders


दुनिया में कुल पांच दौर आएंगे

आप स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया

1)मुसलमानो तुम्हारे इस दीन का  जो पहला दौर है वो नबूवत है और रहमत है। यानि मैं (मुहम्मद स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ) खुद मौजूद हूँ तुम्हारे माबैन जो की सारे आलम के लिए सरापा रहमत हूँ। और ये रहेगी नबूवत रहमत तुम्हारे माबैन जब तक अल्लाह चाहेगा।  फिर इसे उठा लिया जाएगा जब अल्लाह चाहेगा।


2)फिर खिलाफत आएगी जो की नबूवत के नक़्शे क़दम पर होगी। वो भी रहेगी जब तक अल्लाह चाहेगा। फिर इसे भी उठा लिया जाएगा जब अल्लाह चाहेगा।


3) फिर उसके बाद जो दौर होगा वो काट खाने वाली हुकूमतों का होगा। जो बहोत ज़ालिम होगी। ये भी रहेगी जब तक अल्लाह चाहेगा। फिर इसे भी उठा लिया जाएगा जब अल्लाह चाहेगा।


4) फिर उसके बाद एक जबरीयतन मुलुकियत आएगी यानि मजबूरी वाली हुकूमत। यानि हर किसी पर जाबिराना हुकूमत करेगी।  हर किसी को मजबूर करेगी की उसकी पास बानी करो या गुलामी करो। वो भी रहेगी जब तक अल्लाह चाहेगा। फिर इसे भी उठा लिया जाएगा जब अल्लाह चाहेगा।


5) उसके बाद फिर से एक बार दौरे खिलाफत आएगा जो नबूवत के नक़्शे क़दम पर होगा। जिसमे सुन्नते रसूल स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ही  के साथ सारे मुआमलात लोगो के हल किये जाएंगे। और हर सु यानि दुनिया के हर कोने में सिर्फ इस्लाम ही नज़र आएगा। साड़ी दुनिया में इस्लाम छा जाएगा। वो ऐसा दौर होगा की हर कोई राज़ी होगा। ज़मीन वाले राज़ी होंगे आसमान वाले राज़ी होंगे। हर कोई खुश होगा। ना किसी को कोई गिला होगा किसी को कोई शिकवा होगा। आसमान और ज़मीन से अल्लाह की रहमतें और बरकतें ज़ाहिर होंगी।


मुसलमानों  के उरूज का वक़्त करीब है | मुसलमानों  के दौर का आगाज | Beginning of Muslim era | Islamic Wonders

 

एक बात और अर्ज़ करता चालू की जब ये दौर शुरू होगा ये आफ़ाक़ी होगा।  यानी आलम गिर होगा जिसे आम अल्फ़ाज़ों में कहे तो साड़ी दुनिया में क़ायम होगा रुए ज़मीन का कोई हिस्सा इस से बचा ना रहेगा।

 

हज़रात शोबान रज़ि अल्लाहो ताला अन्हो की रिवायत है।

आप स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह ने मेरे लिए साड़ी ज़मीन को लपेट दिया की मैंने ज़मीन के सारे मग़रिब और मशरिक़ देख लिए। और जान लो के मेरी उम्मत की हुकूमत उन तमाम इलाक़ों पर होकर रहेगी की जो अल्लाह ने ज़मीन को लपेट के मुझे दिखा दिए। (मुस्लिम शरीफ)


और अल्लाह ने ज़बूर में भी फ़रमाया था (हालाँकि मैंने उसे नहीं पढ़ा , हाँ मगर किसी आलिम से सुना था ) की बिल आखिर मेरे स्वलेहीन बन्दे सारे ज़मीन के वारिस होंगे।

 

एक और हदीस: हज़रात मिक़दाद बिन अस्मत से रिवायत है (मुसनद अहमद ) की ज़मीन पर कोई घर न बचेगा जहाँ कलमा तय्यबा पहुंचेगा यानि सारी रुए ज़मीन पर हर कोई मोमिन होगा।

 

तो नाज़रीन ये वो ग्लोबलाइजेशन है जो हो कर रहेगी जिसकी खबर हमारे सरकार स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने हम को पहले ही देदी है।


तो दोस्तों ऊपर जो हदीस बयान की गयी है इसके बाद तो हमारा मुत्मइन होना लाज़मी है। और अगर बात करें दौर की तो हम सब जानते हैं की ये दौर जबरन हुकूमत का दौर ही चल रहा है। 

क्यूंकि नबूवत का दौर 1400 साल पहले ही ख़त्म हो गया। उसके बाद हमने खुलफाए राशेदीन का ज़माना देखा। और हम सब इस बात पर भी मुत्तफ़िक़ है की वो दौर बिलकुल हमारे आक़ा मुहम्मद मुस्तफा स्वल्लल्लाहो अलैहिवसल्लम की सुन्नतों भरा दौर था।  जिसके बाद फिर ज़ालिमाना हुकूमत शुरू हो गयी । मिसाल की तौर पर यज़ीद खबीस की ही हुकूमत लेलो। वैसे सारी दुनिया में और भी बहोत से बादशा गुज़रे हैं जिन्होंने अपनी ही लोगो पर ज़ुल्म व तशद्दुद किये। फिर उसके बाद जो ज़माना आया जो की अब तक चल रहा है। यानि मजबूरी वाला दौर और आप सब भी मेरी इस बात पर इज्मा करोगे की ये दौर जबरन हुकूमत वाला दौर है। 


अगर आप नज़र दौड़ाय तो दिखेगा की सऊदी हुकूमत कैसे क़ायम हुई ? इसराइल कैसे आबाद हुआ ? सीरिया की क्या हाल है ? अफगानिस्तान की क्या हालात है। ये तो कुछ मुस्लिम मुमालिक है इसके अलावा जुनूबी कोरिया , अफ्रीका की देश ,जर्मनी, वगैरा ये ही नहीं इस दुनिया का हर वो देश चाहे मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम कही न कही अपनी आवाम को मजबूर किये हुए हैं। 


जिस से सारी इंसानियत ही परेशान है चाहे मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम सब  मजबूर है कुछ नहीं बोल सकती या कुछ नहीं कर सकती। और हर कोई इंक़ेलाब चाहता है , भले ही वो अपनी ज़बान से इसका इक़रार ना करें मगर दिल में बेचैनी ज़रूर है। सुकून तो जैसे हीरे जवाहरात की तरह महँगा हो गया हो। जिस में मुस्लिम क़ौम तो सब से सरे फहरिस्त है।  और वो इसलिए की एक सोची समझी साज़िश की तहत मुस्लिम क़ौम को बदनाम किया गया। जैसे दहशद गर्दी , शरीयत की गलत तस्वीर लोगो को दिखाना , इस्लाम की छवि को सब की सामने ख़राब करना। जिसे हम सब जानते हैं। और अब तो दुनिया भी महसूस करने लगी है की ये सब इस्लामो फोबिया की तहत किया गया। 


लेकिन सारा दोष इन्ही बातिल ताक़तों को देना मेरे हिसाब से गलत होगा। इसकी एक एहम वजह हमारी दीन से दूरी भी है , हमारे इल्म की कमी भी है। हमारा  सुन्नतों को छोड़ना भी है। हमारा नमाज़ो को तर्क करना भी है। हमारा हराम की तरफ झुकाओ भी है। और सब से एहम बात वो ये की हमने अपना अखलाक छोड़ दिया या भूल गए जिस से हमारी पहचान थी। 


और कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता की सब से पहले हमारे आक़ा स्वल्लल्लाहो अलैहिवसल्लम ने अख़लाक़ का ही दरस दिया। अख़लाक़ ही एक ऐसी चीज़ है जो एक दुसरे को जोड़े रखती है। अब आप खुद ही गौर करें की क्या हमने हमारे गैर मुस्लिम भाइयों को अपना सही अख़लाक़ दिखाया कभी उनका भरोसा जीतने की कोशिश की ? नहीं ना !


ये वो सब बातें है जिनकी वजह से आज हर मुसलमान मायूस हो चूका है। 


अब मैं फिर अपने शुरू के टॉपिक पर आजाता हूँ। हम क्यों मायूस हो रहें हैं।  जबकि अल्लाह पर हमारा ईमान है की वो सब कुछ कर सकता है। क्या आपको हज़रत  नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती याद नहीं ? की अल्लाह ने ज़ालिम लोगो से और तूफ़ान से कैसे बचाया ?


क्या आपको हज़रत युसूफ अलैहिस्सलाम दास्तान याद नहीं की कैसे अल्लाह ने उन्हें मुसीबतों से निजात दिलवा के मिस्र का बादशाह बना दिया?


क्या आपको हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का वाक़िया नहीं पता के कैसे अल्लाह ने फिरौन से निजात दी। क्या आपको हमारे प्यारे आक़ा जनाब मुहम्मद रसूल अल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की ज़िन्दगी नहीं मालुम के कैसे आपने मक्के के मुशरिकों पे फ़तेह हासिल की ?


दोस्तों ऐसे ही अनगिनत वाक़ियात हमारे सामने गुज़रे है। जो हमे दरस देतें हैं की 

"आ जितना तैश में आना है सर फिरे तूफ़ान === हमे भी ज़िद है की दरिया को पार करेंगे " 



दोस्तों हमे सिर्फ अपने ईमान पर साबित क़दम रहना है। याद रख्खें ये वही दौर है जिसके बारे में हमारे प्यारे आक़ा मुहम्मद अल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया था की आने वाले वक़्त में ईमान को संभाले रखना हाथ में आग सँभालने से ज़्यादा मुश्किल होगा।फ़िक्र ना करें ये दौर भी अपने इखतताम की तरफ बढ़ रहा है जैसा की हमने ऊपर हदीस मुलाहेज़ा की और उस हिसाब से ये दौर जबरन हुकूमत का दौर है। और अनक़रीब हम फिर रिसालत का परचम लहराता हुआ देखेंगे इंशा अल्लाह 


नाज़रीन चलते चलते सिर्फ इतना अर्ज़ करना चाहता हूँ की इस पुर फितन दज्जाली दौर में अपने ईमान की शम्मा जलाये रख्खो और नमाज़ से वाबस्तगी रख्खो , वालियों से अक़ीदत रख्खो , दिल में मुस्तफा स्वल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की मुहब्बत रख्खो और आप की अहले बैत से इश्क रख्खो इंशा अल्लाह हमारा खात्मा बिल यक़ीन ईमान पर होगा।  

इंशा अल्लाह फिर मुलाक़ात होगी ऐसे ही किसी टॉपिक में तब तक अपना और अपने आस पास के लोगो का भी ख्याल रख्खे। दुआओं में याद रख्खें अल्लाह हाफिज.

***END***

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अल्लाह कितना बढ़ा है ?

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