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Monday, September 7, 2020

100 Baras ke Baad Phir Zinda | Ek Hairat Angez Waqiya | Islamic Wonders


بِسۡمِ اللّٰہِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِیۡمِ

अस्सलाम अलैकुम नाज़रीन,

हस्बे मामूल आज इस पोस्ट में क़ुरान का एक ऐसा रोमांचक और दिलचस्ब वाक़िये का ज़िक्र करेंगे जिसमे अल्लाह का एक ऐसा करिश्मा ज़ाहिर हुआ की एक ही वक़्त में एक ही आब हवा में बाप हीसजी उम्र सिर्फ 40 बरस बेटा जिसकी उम्र 125 बरस और पोता जिसकी उम्र 100 बरस। ये वाक़िया है हज़रात उज़ैर अलैहिस्सलाम का जो बानी इसराइल क़ौम के एक नबी गुज़रे हैं। और उनका ज़िक्र क़ुरान में भी किया गया है।

 

लेहाज़ा आप से गुज़ारिश है की पोस्ट को पूरा पढ़े और पसंद आने की सूरत में दोस्त अहबाब को भी शेयर करे। और अगर आप को कुछ कमी ज़्यादती नज़र आये तो इस्लाह की निय्यत से कमेंट या ईमेल ज़रूर करें।

 

साथ ही हमारे YouTube Islamic Wonders चैनल पर भी विजिट करें

 

तो चलिए नाज़रीन बिला ताख़ीर आगे बढ़ते हैं। मै मुहम्मद हुसैन खान आपका एक बार फिर खैर मक़दम करता हूँ अपने इस ब्लॉग पर जिसका नाम है IslamicWonders,

 

नाज़रीन ये वाक़िया दर असल बानी इसराइल की क़ौम की बाद आमिलयों में हद से पार हो जाने के बाद जब उन पर अल्लाह का अज़ाब आया एक बख्त नसर नामी काफिर बादशा था उसने अपने फ़ौज के साथ बैतूल मुक़द्दस पर हम्ला करदिया। जिसका ज़िक्र हम अपनी पिछली पोस्ट ( ताबूते सकीना ) और ( हैकले सुलेमानी ) में कर चुके हैं।

 



अगर आपने वो दोनों पोस्ट पढ़ी हो तो उसे ज़रूर पढ़े ले आप उसे वीडियो की  शकल में भी समेत कर सकते हो। उसके बाद आपको यहूदी और उनके बारे में सारी सूरत हाल समझ आजायेगी।

 

दोस्तों बख़्ते नसर के इस हमले में एक लाख यहूदी क़त्ल हुए।  और एक लाख मुल्के शाम और दीगर इलाक़ों में इधर उधर पनाह लेने पर मजबूर होगये।  और तक़रीबन एक लाख यहूदी क़ैद करलिए गए। जिन्हे गुलाम बना दिया गया। और बैतूल मुक़द्दस को पूरी तरह मस्मार करदिया गया।  हर मज़हबी दस्तावेज़ को भी जला कर राख करदिया गया।  और ये काफिर ताबूते सकीना को भी अपने साथ ले गए जिसका आज तक कोई पता नहीं।

 

Source from social media

इन्ही गुलाम लोगों में अल्लाह के एक नेक बन्दे और नबी जिनका नाम मुबारक हज़रात उज़ैर अलैहिस्सलाम है , बख़्ते नसर की क़ैद चले गए।  मगर कुछ अरसा बाद किसी तरह अल्लाह के फ़ज़ल से आप अलैहिस्सलाम इसकी क़ैद से आज़ाद हो गए।  और एक गधे के साथ बैतूल मुक़द्दस में दोबारा दाखिल हुए।

 

आपको इस शहर का वीराना पैन और बर्बादी देख कर बहोत रंज हुआ और आप अलैहिस्सलाम रोने लगे , आप अलैहिस्सलाम ने इस निय्यत से की कोई इंसान बचा हुआ मिल जाये चरों तरफ चक्कर लगाया मगर कोई ना मिला , आप अलैहिस्सलाम ढूँढ़ते हुए एक पेड़ के पास पहुंचे देखा की पेड़ में फल पाक चुके हैं मगर कोई तोड़ने वाला नहीं।

 

Source from social media

ये मनज़र देख कर आप अलैहिस्सलाम की ज़बान से ये कलिमात निकले जिसका तर्जुमा ये है की " इस शहर की ऐसी बर्बादी और वीरानी के बाद भला अल्लाह किस तरह फिर इसको आबाद करेगा "

फिर आपने कुछ फल तोड़े और खाये और कुछ अपने थैले में रख लिए। और अंगूर के शैर को भी अपने मश्क में भर लिया , और अपने गधे को एक मज़बूत रस्सी से बांध कर आप भी वहीँ दरख्त के नीचे आराम करने की निय्यत से लेट कर सो गए।

 

Source from social media

और शायद इसी नींद की हालत में आप अलैहिस्सलाम वफ़ात पा गए। अब अल्लाह ने अपनी क़ुदरत ज़ाहिर की और आप अलैहिस्सलाम को तमाम मख्लूक़ की नज़र से ओझल कर दिया की कोई आपको देख सका। वक़्त गुज़रता गया ज़माना बदलता रहा यहाँ तक की आपको वफ़ात पाए 70 बरस का अरसा गुज़र गया और कोई न देख सका।

इधर मुल्के फारस के बादशाहों में एक बादशा अपने लश्कर के साथ बैतूल मुक़द्दस के इस वीराने में दाखिल हुआ , और बहोत से लोगो को फिर से यहाँ आबाद करना शुरू किया, जिस से ये शहर एक बार फिर आबाद होगया। साथ ही जो यहूदी इधर उधर बेस हुए थे उनको भी बुला बुला कर फिर से आबाद किया और उन लोगो को रहने के लिए हर ज़रूरी चीज़ें भी मुहय्यान करवाई। इस तरह ये शहर फिर से खुश हाल और आबाद हो गया।

 

Source from Melchizedek


फिर उधर हज़रात उज़ैर अलैहिस्सलाम जिनको वफ़ात पाए अब तक़रीबन 100 बरस गुज़र चुके थे। अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से फिर ज़िंदा कर दिया और आप अलैहिस्सलाम ने देखा की गधा मर कर साद गाल चूका है और उसकी सदी गली हड्डियां इधर उधर बिखरी पड़ी हैं। और जब आपने अपना थैला देखा तो आपने जो फल और मश्क रक्खे थे जैसे की वैसे ही हैं। ना सादे ना गले। और आपकी उम्र भी वही 40 बरस ही थी। यहाँ तक एक आपके बालों में फरक नहीं आया जो के तू ही थे।

 

Source from youtubeizleindir.org

आप अलैहिस्सलाम ये सब देख कर हैरान ही थे की अल्लाह की तरफ से वही नाज़िल हुई, "ए उज़ैर! आप कितने दिनों तक यहाँ रहे?" तो आप ने ख्याल किया के मैं सुबह के वक़्त सोया था और अब असर का वक़्त हो गया है, ये जवाब दिया की मैं दिन भर उस से कुछ कम सोता रह। " तो अल्लाह ने फ़रमाया "ए उज़ैर! तुम पुरे १०० बरस तक यहाँ ठहरे रहे।" और अब तुम भी हमारी क़ुदरत देखो और अपने गधे को देखो की इसकी हड्डियां गल सड़ गयी हैं। और पूरी तरह फनाह होचुका है। और अब अपने थैले में देखो की तुम्हारी खाने पीने की चीज़ें जैसी की वैसी ही है, उनमे कोई खराबी नहीं हुई। फिर इशारा फ़रमाया की "ए उज़ैर! अब तुम देखो किस तरह हम इन हड्डियों को उठा कर इन पर गोश्त पोश्त चढ़ा कर इसे फिर से कैसे ज़िंदा करते हैं। और तमाम हड्डियां मिल कर एक ढांचा बन गयी और देखते ही देखते उस पर गोश्त पोश्त चमड़ी सब चढ़ गयी और फिर गधा ज़िंदा होगया। ये देख कर हज़रात उज़ैर अलैहिस्सलाम की ज़बान से बुलंद आवाज़ से निकला " मैं यक़ीन और ईमान रखता हूँ की अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।

 

Source from Melchizedek

इसके बाद हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम शहर का दौरा करते हुए उस मक़ाम पर पहुंचे जहाँ 100 बरस पहले आपका माकन हुआ करता था। तो ना आपको किसी ने पहचाना और नहीं आपने किसी को पहचान। हाँ अलबत्ता ये देखा की एक बहुत बूढी औरत जो अंधी और अपाहिज थी। माकन के पास बैठी थी। जिस ने आपको अपने बचपन में देखा था। आप ने उस से पुछा की क्या ये उज़ैर का घर है ? तो उस बुढ़िया ने जवाब दिया हाँ, फिर बुढ़िया ने पुछा तुम उज़ैर का ज़िक्र क्यों करते हो उसे तो लापता हुए 100 बरस बीत चुके हैं। ये कहे कर बुढ़िया रोने लगी।

 

तो फिर आपने उस बुढ़िया से कहा की "ए बुढ़िया मैं ही उज़ैर हूँ । तो उस ने कहा की सुबहान अल्लाह आप कैसे उज़ैर हो सकते हो? फिर आप ने उसे अपनी सारी दास्ताँ बयां की और कहा की अब मैं अपने घर वापिस आया हूँ।  तो बुढ़िया ने कहा हज़रात उज़ैर अलैहिस्सलाम तो ऐसी शख्सियत थी की अगर कोई भी दुआ अल्लाह से मांगते तो फ़ौरन पूरी होजाती। अगर आप वाक़ई उज़ैर हो तो मेरे लिए अल्लाह से दुआ करो की मेरी बिनाई वापिस आजाये और मेरा फालिज भी दूर होजाये। तो आप अलैहिस्सलाम ने उस के लिए दुआ की और वो बुढ़िया बिलकुल ठीक होगई।

 

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फिर जब अपनी आँखों से आप हज़रत को देखा तो फ़ौरन पहचान लिया। फिर वो आपको लेकर बानी इसराइल के मोहल्ले में गयी इत्तेफ़ाक़ से वह सब लोग एक महफ़िल में जमा थे। जहाँ आपका बेटा भी था जिस की उम्र अब 125 बरस का हो चूका था। और आपके पोते भी थे वो भी बहोत बूढ़े हो चुके थे।

 

Source from maxresdefault

बुढ़िया ने मजलिस में शहादत दे की ये ही हज़रत उज़ैर है। लेकिन किसी ने उस की बात पर यक़ीन ना किया। इतने में उनके बेटे ने कहा की मेरे बाप के दोनों कंधो के दरमियान काले रंग का एक मस्सा था।  जो चाँद की तरह नज़र आता था। चुनांचे आपने अपना कुरता उतार कर वो मस्सा भी दिखा दिया। फिर भी लोग ना माने। तो कुछ ने कहा की उज़ैर को तो तौरात शरीफ ज़बानी याद थी अगर तुम वही हो तो हमे पढ़ कर सुनाओ। तो आप अलैहिस्सलाम ने पूरी तौरात शरीफ पढ़ कर सुना दी।


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अब यहाँ एक मसला ये पैदा होगया की जब बख़्ते नसर ने बैतूल मुक़द्दस पर हमला किया था तो एक भी तौरात का नुस्खा बाक़ी ना छोड़ा सब के सब मिटा दिया या जला दिया और जो उसके हाफिज थे उन्हें भी चुन चुन कर क़त्ल कर दिया। इसलिए अब ये कैसे पता चले की जो आप अलैहिस्सलाम ने जो पढ़ा है वो सही है। तो एक आदमी ने कहा की मैंने मेरे बाप से सुना था की जब बख्त नसर ने हमे क़ैद किया तो उस से पहले एक तौरात का नुस्खा वीराने में एक अंगूर की बेल के नीचे छुपा दी थी।  अगर तुम लोग मुझे मेरे अंगूर की जगह की निशान दही करवा दो मैं एक नुस्खा बरामद कर सकता हूँ। लेहाज़ा सब लोगो ने मिल कर जगह ढून्ढ ली और तौरात शरीफ का एक नुस्खा बरामद करलिया।

 

और जब लोगो ने जांचा की जो आपने पढ़ा है बिलकुल हर्फ़ बा हर्फ़ सही है। ये अजीब ो गरीब माजरा देख कर सारे लोगो ने एक ज़बान हो कर कहा की ये ही है हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम और यक़ीनन ये अल्लाह के बेटे हैं। यहाँ एक बात और अर्ज़ करता चलू की इसी दिन से ये गलत मुश्रिकाना अक़ीदह यहूदियों में फैल गया, की माज़ अल्लाह हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम अल्लाह के बेटे हैं। जो आज तक साडी दुनिया के यहूदियों में पाया जाता हैं। यहूदियत में आप का नाम Ezra है।

 

खैर नाज़रीन इस वाक़िये से साफ़ पता चलता है और हमारा ईमान भी पुख्ता होता है की अल्लाह जो चाहे कर सकता है। वो हर किये पर क़ादिर है। और बेशक रोज़े क़यामत भी अल्लाह ऐसे ही हमे उसे ज़िंदा करेगा। इस वाक़िये से एक और बात की तरफ ध्यान लेजाना चाहता हूँ की इस से ये भी साबित होता है की एक ही क़ब्रस्तान में एक ही आब व हवा में बाज़ मुर्दों की लाशें तो साद गाल कर फ़ना होजाती है। और बाज़ बुज़ुर्गों की लाशें सलामत रहे जाएँ और उनका कफ़न भी मैला न हो।  ऐसा ज़रूर हो सकता है , बल्कि बढ़ा ऐसा देखा गया है , और हज़रात उज़ैर अलैहिस्सलाम का वाक़िया इसका एक क़ुरानिक सबूत भी है (वाल्ला हो आलम )

100 Baras ke Baad Phir Zinda | Ek Hairat Angez Waqiya | Islamic Wonders

Roman English

Assalam Alaikum Dosto


Hasbe mamul aaj hum is Post me quran ke ek aise roamacnhak aur dilchasp waqiye ka zirk karnenge jisme Allah ka ek aisa karishma zahir hua jo humare liye ibrat ka nishan hai ki ek hi waqt me Baap jiski umr 40 Baras Beta jiski umr 125 Baras aur Pota jiski umr takreban 100 Baras, ye waqiya hai Hazrat Uzair Alaihissalm ka jo bani Israel ki Qaum me Nabi guzre hain, aur inka zikr quran me bhi aya hai, 


Lehaza aap se guzarish hai ki Pura zarur padhen, aur pasand aane ki surat me dost ahebab ko share zarur Karen,


Doston humare YouTube jiska link humne Last me diya hua hai zarur visit Karen insha Allah aapko zarur pasand ayega.


Mai Mohammad Hussain Khan ek bar fir aapka khair maqdam karta hun apne is Website par jis ka Naam hai  #Islamic Wonders


Islamic Wonders ke naazreen, ye waqiya darasal bani ki qaum ke bad amaliyon me had se paar hojane ke baad Jab un par Allah ka Azab aya k eek bakht nasar babuli jo ki ek kaafir badhsah tha, usne ek badi fuaj ke sath Baitul Muqaddas par humla kardiya, jiska zikr hum apne pichli post me {Taboote Sakina aur Haikale Sulemani} me kar chuke hain,


Is topic par humne YouTube par video bhi post kar chuke hai Agar aapne un video ko nahi dekha hai to aapse guzarish ki humne post ke aakhir me link diya hua aap use bhi zarur dekehe aapko yahudiyon ki puri surat e haal samajh ajengi,


Khair nazreen bakhte nasar ke is humle me ek lakh yahudi qatle hue,  aur ek laakh ko mulke sham me idhar udhar bikher diya gaya, aur takreban itne hi qaid karliye gain, jinhe gulam bana diya gaya, aur baitul muqaddas ko puri tarah masmar kardiya gaya,aur har mazhabi dastavez ko bhi jala kar rakh kar diya jisme Taurat Shareef bhi shamil hai

100 Baras ke Baad Phir Zinda | Ek Hairat Angez Waqiya | Islamic Wonders

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Inhi gulaam logon me Allah k eek nek bande jink a Naam quran me Hazrat Uzair Alahissalm aya hai, bakht nasar ki qaid me chale gayen, magar kuch arse ke baad kisi tarah Aap Hazrat Uzair Alaihissalm iski qaid se azad hogaye aur ek gadhe ke sath apne shaher baitul muqaddas me dobara dakhil hue,


Apne is shaher ka virana pan aur barbadi dekh kar aapko bahot ranj hua aur Aap Alaihissalm rone lage, Aap Alaihissalm ne is niyaat se ki kahi koi insan bacha hua mil jaye Charon taraf chakkar lagaya magar koi insan nazar na aya, Aap Alaihissalam Dhoondte dhoondte ek pedh ke pass pahunche dekha ke pedh me phal aakar pak chuke hain magar koi todne wala nahi,

100 Baras ke Baad Phir Zinda | Ek Hairat Angez Waqiya | Islamic Wonders

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Ye manzar dekh kar Aap Alaihissalam ki zaban se be sakhta ye kalimat nikal padhe, jiska tarjuma ye hain ki, “ Is shaher ki aisi barbadi aur virani ke baad, bhala kis tarah Allah fir isko abaad karega “


Fir apne kuch phal tode aur khae aur kuch phal apne thaile me rakh liye aur angoor ke shire ko bhi apne mashk me bhar liya, aur apne gadhe ko ek mazboot rassi se bandh diya, aur aap bhi wahi ek darakht ke neeche aram karne ki niyyat se let kar so gayen,

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Aur shahyad isi neend ki halat me Aap Alaihissalm wafar pa gayen, Ab Allah ne apni qudrat zahir ki aur Aap Alaihissalam ko tamam makhlooque ki nazar se ojhal kardiya ke koi aapko dekh na saka, waqt guazarta gaya zamana badalta raha yahan tak ki aapko wafat paye 70 saal ka arsa guzar gaya aur aapko koi na dekh saka,


Idhar Mulke Faras ke badshahon me ek Badshah apne lashkar ke sath Baitul Muqaddas ke is virane me dakhil hua, aur bahot se logo ko fir yaha lakar basana shuru kiya, jis se ye shaher ek baar fir abaad hogaya, sath jo yahudi idhar udhar base hue the unko bhi bula bula kar fir se yaha abaad kiya, aur un logo ko rahene ke liye imaraten bag wo sab kuch kar ke diya jiski zarur hoti hain, is tarah ye shaher fir se khus haal aur abaad ho gaya,

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Fir idhar Hazrat Uzair Alaihissalam jinko wafat paye ab tariban 100 baras ka arsa guzar chuka tha, Allah ne apni qudrat e qamela se inhe fir usi umr me zinda farma diya aur aap ne dekha ke Gadha mar kar sad chuka hai aur suki sadi gali safed haddiyan idhar udhar bikhri padi hai, aur jab apna thaila dekha to Aapne jo phal aur mashk rakkha tha bilkul jaise ki waisa hi rakkha hua na sada na galay, aur Aap Alahissalam ke sar aur dadhi ke baal bhi kaale hi hai, aur aapki umar ab bhi wahi 40 baras hai,

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Aap Alaihissalam ye sab dekh kar hairan hi the ki Allah ki taraf se wahi naazil hui, ki “Ay Uzair! Aap kitne dino tak yaha rahe?” to aapne khayal kiya kar ke ki mai subah ke waqt soya tha, aur ab Asar ka waqt ho hogaya hai, ye jawab diya ki mai din bhar ya din bhar se kuch kam sota raha, to Allah ne farmaya ki nahi “Ay Uzair tum pure 100 baras yahan thahere rahen, ab tum humari qudrat ka nazara karne ke liye zara apne gadhe ko dekho ki iski haddiyan gal sad kar bikhar chuki hai, aur apne khane peene ki cheezen par nazar dalo ki un me koi kharabi aur bigad nahi paida hua hai, phir isharah farmaya ki “Ay Uzair! Ab tum dekho kis tarah hum kis tarah in haddiyon ko utha kar in par gosht posht Chadha kar is gadhe ko fir se kaise zinda karte hain, chunanche Hazrat Uzair Alaihissalam ne dekha ki achanak hiddiyon me harkat paida hui, aur tamam hiddiyan mil kar ek dhancha ban gayee, dekhte hi dekhte us par ghosht chamdi sab chadh gayee, aur fir gadha zinda hogaya, ye dekh kar Hazrat Uzair Alaihissalam se ki zaban se buland awaz se nikla, “jiska maani hai ki “mai yaqeen aur imaan rakhta hun ki Allah tala har cheez par Qaadir hai”


100 Baras ke Baad Phir Zinda | Ek Hairat Angez Waqiya | Islamic Wonders

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Is ke baad Hazrat Uzair Alaihissalam shaher ka daura karte hue us maqam par pahonche jahan 100 baras pahele unka makan tha, to na aapne kisi ko pahechana, na kisi ne aapko, han albatta ye dekha ki ek bahut hi budhi aur apahij aurat makan ke paas baithi hui hai, jis ne apne bachpan me Aap Hazrat Uzair Alaihissalam ko dekha tha, Aap ne use dekha aur poocha ki kya ye hi Uzair ka makan hai? To us budhiya ne kaha “jee han” phir budhiya ne poocha ki Uzair ka zikr tum kyun kar rahe ho? Unko to lapata hue 100 baras ho chuke hain, ye kahe kar budhiya rone lagi,


To apne farmaya ki “Ay budhiya! Mai hi Uzair hun, to budhiya ne kaha ki Subhan Allah Aap kaise Uzair ho sakte ho? Fir Aap Alaihissalam ne apna pura waqiya bayan kiya, aur ab mai apne ghar wapis ayah hun, to budhiya ne jawab diya ki Hazrat Uzair Alaihissalam to aisi bakamal shakhsiyat thi ki unki har dua qabool hoti thi, agar Aap waqee Hazrat Uzair Alaihissalam hai to mere liye dua kar dijiye ki Allah meri binai wapis karden, aur mera falij du rho jaye, to Hazrat Uzair Alaihissalam ne us ke liye dua kardi to Allah ne us budhiya ki aankhe wapis kardi aur uski bimari bhi theek hogayee,


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Phir jab us budhiya ne Aap Hazrat Uzair Alaihissalam ko dekha to fauran pahechan liya aur kaha ki mai shahadat deti hun ki tum wahi ho, phir wo Aap Hazrat Uzair Alaihissalam ko lekar bani israil ke mohalle me gayee, ittefaque se wahan sab log ek mahefil me jama hue the, aur isme Aap Hazrat Uzair Alaihissalam ka farzand bhi maujood tha, jo kam o besh 125 baras ka ho chukka tha,aur Aap ke chand pote bhi the jo budhe ho chuke the,

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Budhiya ne majlis me shahadat di aur elan kiya ki “Ay logo! Bila shubah ye Hazrat Uzair Alaihissalam, lekin kisi ne bhi us budhiya ki baat na maani, itne me unke ladke ne kaha, ki mere baap ke dono kandho ke darmiyan kaale rang ka massa tha, jo chand ki shakal ka tha, chunanche Aap Hazrat Uzair Alaihissalam ne apna kurta utar kar dikha diya to wo massa nazar agaya, phir bhi logo ko yaqeen na hua to kuch purane logo ne kaha ki Uzair ko to Taurat Shareef zabani yaad thi agar tum hi Uzair ho to hume padh kar suanao Aap Hazrat Uzair Alaihissalam ne bila jhijak padh ke suna di,


Ab yaha masala ye paida ho gaya ki jab bakhte nasar ne Baitul Muqaddas par hamla kiya tha to ek bhi Taurat ka nuskha baaqi na rakkha tha sab ki sab mita di ya jala di, aur jo us kitab ke hafiz the unhe chun chun kar qatl kardiya tha, islilye ab ye kaise pata chale ki jo Hazrat Uzair Alaihissalam ne padhi hai wahi sahi Taurat Shareef hai? To ek Aadmi ne kaha ki maine apne baap se suna tha ki, jis din bakhte nasar ne hum logo ko giraftar kiya tha, us din ek virane me ek angoor ki bel ki jad me Taurat ki ek jild chupa di thi, agar tum log mere Dada ke angoor ki jagah ki nishan dahi kardo to mai Taurat ki ek jild baramad kardoonga, chunanche logo ne talash shuru ki aur zameen khod kar wo jild bahar nikal li,

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Aur jab logo ne jaancha ki jo Hazrat Uzair Alaihissalam  ne padha tha to wo harf ba harf sahi nikla, ye ajeeb o gareeb majra dekh kar sare logo ne ek zaban ho kar kaha ki ye hi Hazrat Uzair Alaihissalam hain,aur yaqeenan ye Khuda ke bete hain,


Yahan ek baat aur arz karta chalu ki isi din se ye galat mushrikana aqidah Yahudiyon me phail gaya, ki Maaz Allah Hazrat Uzair Alaihissalam Allah ke bete hain, aur aaj tak sari duniya ke Yahudi is aqideh par jama hai ki Hazrat Uzair Alaihissalam Allah ke bete hain, Maaz Allah,

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Likhne me bahot ashaqqat lagti hai agar koi galati dekhe to please islah ki niyyat se comment me zarur batae please

Pasand aane ki surat me dost o ahebab ko bhi share Karen, sath ise video ki shakal me samat karne ke liye humare YouTube Channel Islamic Wonders ko bhi zarur visit kare aur subscribe kare.


Isi ke sath ab roukhsat hote hain fir mulaqat hogi ek nay Topic ke sath Allah Hafiz and Jazak Allah


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